धर्म

पिठौरी अमावस्या 22 अगस्त 2025, जानते है इसका धार्मिक महत्व।

पिठौरी अमावस्या 22 अगस्त 2025, जानते है इसका धार्मिक महत्व।

तिथि व समय ।

हिंदू पंचांग और रिपोर्टों के अनुसार, पिठौरी अमावस्या 22 अगस्त 2025 को पड़ रही है। अमावस्या तिथि 22 अगस्त दोपहर लगभग 11:55 बजे से शुरू होकर 23 अगस्त सुबह लगभग 11:35 बजे तक रहेगी ।

इस तिथि मध्यकाल 22 अगस्त को पड़ने के कारण, वही दिन व्रत और पूजा के लिए उपयुक्त माना गया है।

व्रत का प्रमुख प्रदोष मुहूर्त शाम 6:53 बजे से रात 9:06 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि लगभग 2 घंटे 12 मिनट है ।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

पिठौरी अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या या कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन पवित्र कुशा तृण (घास) एकत्र किया जाता है, जिसका श्राद्ध कर्म और धार्मिक क्रियाकलापों में प्रयोग होता है ।

यह दिन पितृ पूजन, दान, स्नान और तर्पण के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। पवित्र नदियों में स्नान करने या गृह में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से पितरों की संतुष्टि और आशीर्वाद प्राप्त होता है ।

लोक मान्यता के अनुसार, इस दिन की गई सेवा और दान से संतान सुख, परिवार की समृद्धि, एवं पितृबाधा का निवारण होता है ।

कथाओं में बताया गया है कि मां पार्वती ने व्रत के महत्व की कथा सुनाई, और महिलाएं आटे से “योगिनियों” की मूर्तियाँ बनाकर आराधना करती हैं—जो शक्ति और सौभाग्य के प्रतीक हैं।

 

 

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