लखनऊ

उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक के प्रमुख प्रस्ताव (2 सितंबर 2025)

उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक के प्रमुख प्रस्ताव (2 सितंबर 2025)

कुल प्रस्तावों की संख्या।

कैबिनेट ने कुल 15 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 16 प्रस्तावों बताई गई है, लेकिन अधिक प्रमाण आधारित रिपोर्टों में संख्या 15 ही पुष्ट है ।

प्रमुख एवं उल्लेखनीय प्रस्ताव

1. आउटसोर्स सेवा निगम (Uttar Pradesh Outsource Service Corporation) का गठन।

एक गैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में निगम का गठन स्वीकृत किया गया (sec-8, Companies Act 2013 के अंतर्गत) ।

कर्मचारियों को 3 वर्ष के अनुबंध पर नियुक्त किया जाएगा, मासिक वेतन ₹16,000–₹20,000, सीधे बैंक में, साथ में PF और ESI योगदान शामिल होगा। नियुक्ति प्रक्रिया में लिखित परीक्षा व साक्षात्कार अनिवार्य होंगे ।

नियुक्ति में अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिक और महिलाओं को आरक्षण मिलेगा; मातृत्व अवकाश तथा प्रशिक्षण सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएँगी ।

किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को ₹15,000 अंतिम संस्कार सहायता दी जाएगी ।

2. ई-बसों का संचालन (Urban e-bus initiative)

लखनऊ और कानपुर में इलेक्ट्रिक बसों (9-मीटर, AC) को NCC (Net Cost Contract) मॉडल पर चलाने की मंजूरी मिली ।

10 मार्गों पर प्रत्येक मार्ग पर न्यूनतम 10 ई-बसें चलाए जाएँगी; निजी ऑपरेटर बसों का निर्माण, पूर्ति, जीर्णोद्धार, परिवहन और रखरखाव करेंगे। सरकार लाइसेंस, चार्जिंग और तकनीकी बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराएगी ।

3. नवीन निर्यात प्रोत्साहन नीति (Export Promotion Policy 2025-30)

2020-25 की नीति का उन्नत संस्करण—Export Promotion Policy 2025-30—स्वीकृत हुई है, जिसका उद्देश्य डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सहायता एवं प्रशिक्षण के माध्य से निर्यात को बढ़ावा देना है ।

नीति से संबंधित लक्ष्य में निर्यातकों की संख्या को 2030 तक 50% बढ़ाना शामिल है, साथ ही समस्त जिलों को निर्यात गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है ।

4. शिक्षा क्षेत्र में—स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय।

शाहजहांपुर में स्वामी शुकदेवानंद राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई। यह निर्णय मुमुक्श आश्रम ट्रस्ट के पाँच संस्थानों को विश्वविद्यालय में परिवर्तित करने से जुड़ा है ।

5. डिजिटल और जवाबदेह नियमन: 1860 का सोसाइटी पंजीयन एक्ट बदलने की तैयारी।

ब्रिटिश-कालीन 1860 Society Registration Act को समाप्त कर एक नया डिजिटल, पारदर्शी तथा KYC-आधारित कानून लाने की दिशा में काम शुरू किया गया है। यह सुधार संगठनों की रजिस्ट्री, नवीनीकरण और जवाबदेही में ढांचागत सुधार लाएगा ।

इसको सारांश में तालिका के अनुसार समझ सकते है।

क्रमांक मुख्य प्रस्ताव सारांश विवरण।

1- आउटसोर्स सेवा निगम का गठन पारदर्शी भर्ती, ₹16–20K वेतन, PF/ESI, आरक्षण, सुरक्षा लाभ।

2- ई-बस संचालन लखनऊ-कानपुर में निजी ऑपरेटर मॉडल द्वारा संचालन।

3- निर्यात नीति 2025-30 निर्यातकों में वृद्धि, डिजिटल और वित्तीय सहायता।

4- स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना शैक्षिक एकीकरण और उच्च शिक्षा सुविधाएं।

5- नया डिजिटल सोसाइटी पंजीयन कानून पारदर्शिता, जवाबदेही, KYC-आधारित ऑनलाइन प्रक्रिया।

यह कैबिनेट बैठक योगी सरकार की प्रशासनिक सुधार, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, बुनियादी ढाँचा और डिजिटल सुधारों के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विशेष रूप से आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा, ई-परिवहन का विस्तार, निर्यात और शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक नीतिगत निवेश इन प्रस्तावों की स्थिरता और प्रभाव को उजागर करते हैं।

 

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