लखनऊ

“हिंदू होने पर गर्व, लेकिन संवैधानिक जिम्मेदारी सर्वोपरि” — केजीएमयू वीसी सोनिया नित्यानंद का संतुलित बयान।

“हिंदू होने पर गर्व, लेकिन संवैधानिक जिम्मेदारी सर्वोपरि” — केजीएमयू वीसी सोनिया नित्यानंद का संतुलित बयान।

भूमिका: बयान जिसने खींचा सबका ध्यान

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के हालिया बयान ने शैक्षणिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व है, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया कि संवैधानिक पद पर रहते हुए निष्पक्षता, समानता और कानून के अनुरूप आचरण उनकी पहली जिम्मेदारी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ मामलों को लेकर माहौल संवेदनशील बना हुआ है।

हिंदू पहचान पर खुलकर विचार

डॉ. सोनिया नित्यानंद ने अपने बयान में यह बात साफ की कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान उसकी निजी आस्था का विषय होती है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं को हिंदू मानती हैं और इस पहचान पर उन्हें गर्व है। उनका मानना है कि अपनी जड़ों और संस्कृति को लेकर सकारात्मक भाव रखना स्वाभाविक है और इसमें कोई असंवैधानिक बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें फिर से जन्म लेने का अवसर मिले तो वह हिंदू परिवार में ही जन्म लेना चाहेंगी।

संवैधानिक पद और व्यक्तिगत आस्था में अंतर

वीसी सोनिया नित्यानंद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि निजी विश्वास और संवैधानिक जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट रेखा खींचना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुलपति का पद एक संवैधानिक और प्रशासनिक दायित्व है, जिसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं हो सकता। चाहे छात्र हों, डॉक्टर हों, कर्मचारी हों या मरीज—सभी के साथ समान व्यवहार करना ही इस पद की मूल भावना है।

निष्पक्षता और समानता का संदेश

अपने वक्तव्य में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में धर्म, जाति, वर्ग या किसी अन्य आधार पर पक्षपात की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज की सेवा करना है। इस मिशन को पूरा करने के लिए निष्पक्ष प्रशासन और पारदर्शी निर्णय अनिवार्य हैं।

हालिया विवादों की पृष्ठभूमि

डॉ. सोनिया नित्यानंद का यह बयान ऐसे समय आया है जब केजीएमयू हाल के दिनों में कुछ विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठे थे। इन्हीं परिस्थितियों के बीच उनका यह वक्तव्य सामने आया, जिसे कई लोग स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्पष्टता

कुलपति ने यह भी कहा कि किसी भी शिकायत या आरोप की जांच कानून के दायरे में रहकर ही की जाती है। प्रशासन का काम भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और नियमों के अनुसार निर्णय लेना है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर कोई मामला कानून से जुड़ा होता है, तो उसे संबंधित एजेंसियों को सौंपना ही उचित प्रक्रिया है।

शिक्षा और चिकित्सा संस्थान की भूमिका

डॉ. नित्यानंद ने यह भी रेखांकित किया कि केजीएमयू केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए उम्मीद का केंद्र है। यहां पढ़ने वाले छात्र, काम करने वाले डॉक्टर और इलाज के लिए आने वाले मरीज अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आते हैं। ऐसे में संस्थान का दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वह सबके लिए सुरक्षित, निष्पक्ष और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करे।

समाज को दिया संतुलन का संदेश

उनके बयान को कई लोग सामाजिक संतुलन का संदेश भी मान रहे हैं। एक ओर उन्होंने अपनी व्यक्तिगत आस्था को लेकर स्पष्टता दिखाई, वहीं दूसरी ओर यह भी जताया कि सरकारी या संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति किसी एक विचारधारा या पहचान से ऊपर उठकर काम करता है। यह संदेश खास तौर पर मौजूदा समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आलोचना और समर्थन—दोनों स्वर

इस बयान के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे ईमानदार और स्पष्ट विचार माना, जबकि कुछ ने संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ऐसे बयान को लेकर सवाल भी उठाए। हालांकि समर्थकों का कहना है कि डॉ. नित्यानंद ने निजी आस्था और प्रशासनिक कर्तव्य के बीच संतुलन की बात कर एक जिम्मेदार उदाहरण पेश किया है।

कुल मिलाकर, केजीएमयू वीसी सोनिया नित्यानंद का यह बयान निजी विश्वास और सार्वजनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को रेखांकित करता है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि व्यक्तिगत पहचान पर गर्व करना अलग बात है, लेकिन संवैधानिक पद पर रहते हुए निष्पक्षता और समानता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यही संदेश इस पूरे बयान का मूल सार है, जो न केवल केजीएमयू बल्कि पूरे समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण सीख के रूप में देखा जा रहा है।

 

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