
पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर बैंककर्मियों का देशव्यापी आंदोलन।
केंद्र सरकार के फैसले से नाराज बैंककर्मी सड़कों पर उतरे।
लखनऊ।पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। केंद्र सरकार द्वारा लंबे समय से इस मांग को नजरअंदाज किए जाने के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले देशभर में प्रदर्शन किए गए। राजधानी लखनऊ में भी बैंककर्मियों ने विभिन्न बैंक शाखाओं पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
लखनऊ की प्रमुख बैंक शाखाओं पर हुआ जोरदार प्रदर्शन।
लखनऊ में यूनियन बैंक (कपूरथला), सेंट्रल बैंक (हजरतगंज), बैंक ऑफ इंडिया (चौक) और केनरा बैंक (गोमती नगर) सहित कई प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बाहर बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान बैंककर्मी हाथों में तख्तियां लेकर “पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करो” और “बैंककर्मियों के साथ भेदभाव बंद करो” जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए बैंकिंग कार्य भी प्रभावित रहा।
सरकार के अड़ियल रवैये पर हड़ताल तय – अनिल श्रीवास्तव
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अनिल श्रीवास्तव, जिला संयोजक, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बैंककर्मियों की मांग पूरी तरह जायज है, लेकिन सरकार जानबूझकर इसे टाल रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अपने अड़ियल रवैये से पीछे नहीं हटी, तो बैंककर्मी देशव्यापी हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। उन्होंने बताया कि यूएफबीयू के आह्वान पर आज पूरे देश में एक साथ प्रदर्शन किए गए हैं।
अन्य विभागों में लागू है पांच दिवसीय कार्य प्रणाली।
अनिल श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि जब केंद्र और राज्य सरकार के अनेक विभागों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य प्रणाली पहले से लागू है, तो फिर बैंककर्मियों को इससे अलग क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने इसे बैंककर्मियों के साथ खुला भेदभाव बताया और कहा कि सरकार को इस पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।
बढ़ते कार्यभार और तनाव से जूझ रहे हैं बैंककर्मी।
सभा को संबोधित करते हुए कामरेड वाई.के. अरोड़ा, लक्ष्मण सिंह, एस.के. संगतानी, संदीप सिंह, वी.के. माथुर, बी.डी. पाण्डेय, राकेश पाण्डेय और विभाकर कुशवाहा ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
डिजिटल बैंकिंग, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, स्टाफ की भारी कमी और लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली के कारण बैंककर्मी मानसिक और शारीरिक तनाव में काम कर रहे हैं। ऐसे में पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
बैंककर्मी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़।
वक्ताओं ने कहा कि बैंककर्मी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सरकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने से लेकर डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने तक में बैंककर्मियों की अहम भूमिका रही है। इसके बावजूद उनकी कार्य-परिस्थितियों और स्वास्थ्य की लगातार अनदेखी की जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
सरकार और IBA को दी गई सख्त चेतावनी।
प्रदर्शन में शामिल कामरेड धनंजय सिंह, वी.के. श्रीवास्तव, तारकेश्वर चौहान, आकाश शर्मा, आशुतोष वर्मा, ललित श्रीवास्तव, विशाखा वर्मा, दिनेश विश्वकर्मा, शकील अहमद, कीर्तिवर्धन सिंह, के.एम. श्रीवास्तव और मोनिका शुक्ला सहित अन्य नेताओं ने सरकार और भारतीय बैंक संघ (IBA) को चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि यदि बैंककर्मियों की मांगों को जल्द नहीं माना गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
आगामी आंदोलन की रूपरेखा घोषित।
इस मौके पर अनिल तिवारी, मीडिया प्रभारी, ने आंदोलन के अगले चरण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 4 जनवरी को बैंककर्मी देशव्यापी ट्विटर अभियान चलाएंगे, जिसके जरिए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई जाएगी।
वहीं 5 जनवरी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा पर सुबह 11 बजे से धरना और दोपहर 2 से 3 बजे तक संयुक्त प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
सरकार पर फैसला लेने का बढ़ता दबाव।
यूएफबीयू नेताओं ने साफ कहा कि अगर इन कार्यक्रमों के बावजूद सरकार ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो बैंककर्मी हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। बैंककर्मियों का मानना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली से न केवल कर्मचारियों का कार्य-संतुलन सुधरेगा, बल्कि ग्राहकों को भी बेहतर और अधिक प्रभावी बैंकिंग सेवाएं मिल सकेंगी।



