मनरेगा कर्मियों की मांगों को लेकर आरएलडी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय से मिला प्रतिनिधिमंडल।

मनरेगा कर्मियों की मांगों को लेकर आरएलडी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय से मिला प्रतिनिधिमंडल।
लखनऊ न्यूज | मनरेगा कर्मचारी समाचार | RLD उत्तर प्रदेश
लखनऊ।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कार्यरत कर्मियों की समस्याओं को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय से लखनऊ में मुलाकात की। इस दौरान मनरेगा कर्मियों ने वेतन वृद्धि, सुविधाओं की कमी, भविष्य निधि भुगतान और रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी जैसी कई अहम मांगें प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष रखीं।
मनरेगा कर्मियों की प्रमुख समस्याओं पर हुई विस्तार से चर्चा
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मनरेगा कर्मी ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक को जमीनी स्तर पर लागू कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
कर्मियों ने कहा कि वर्तमान वेतन महंगाई के अनुरूप नहीं है और वेतन भुगतान में कई तरह की विसंगतियां बनी हुई हैं, जिससे आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
वेतन वृद्धि और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग
मनरेगा कर्मियों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि उनके वेतन में तत्काल वृद्धि की जाए और लंबे समय से चली आ रही वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर किया जाए। कर्मियों का कहना है कि बढ़ते कार्यभार और जिम्मेदारियों के मुकाबले उन्हें बेहद कम पारिश्रमिक दिया जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है।
डिजिटल कार्य के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जरूरत
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि मनरेगा कार्यों में अब अधिकतर काम डिजिटल माध्यम से किया जाता है, लेकिन इसके लिए आवश्यक मोबाइल, टैबलेट, इंटरनेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कर्मियों को उपलब्ध नहीं कराए जाते।
उन्होंने मांग की कि सरकार द्वारा सभी मनरेगा कर्मियों को आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि कार्य में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित हो सके।
कार्यस्थल की दूरी और लंबित पीएफ भुगतान बना बड़ी समस्या
कर्मियों ने यह भी बताया कि कई स्थानों पर उनके घर से कार्यस्थल की दूरी अत्यधिक है, जिससे उन्हें समय और धन दोनों की हानि उठानी पड़ती है। प्रतिनिधिमंडल ने इस दूरी को युक्तिसंगत किए जाने की मांग रखी।
इसके साथ ही लंबित भविष्य निधि (PF) भुगतान को समय से निस्तारित किए जाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा की भी रखी मांग
प्रदेश मीडिया प्रभारी मयंक त्रिवेदी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने मनरेगा कर्मियों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, उनके बच्चों की शिक्षा में सहायता, तथा भविष्य की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।
कर्मियों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उनके लिए कोई ठोस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।
100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार देने की मांग
मनरेगा कर्मियों ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को “जी-राम-जी” नाम से संबोधित किए जाने का स्वागत करते हुए यह मांग रखी कि वर्तमान में मिलने वाले 100 दिन के रोजगार को बढ़ाकर 125 दिन किया जाए।
उनका कहना है कि इससे न केवल कर्मियों, बल्कि ग्रामीण मजदूरों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आरएलडी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय का बड़ा बयान
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन देते हुए कहा कि मनरेगा कर्मियों की सभी मांगें पूरी तरह जायज हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल हमेशा श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। डॉ. राय ने भरोसा दिलाया कि वे उत्तर प्रदेश सरकार से मिलकर मनरेगा कर्मियों की वेतन वृद्धि, सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों को मजबूती से उठाएंगे।
मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ – विजय श्रीवास्तव
इस अवसर पर आरएलडी के राष्ट्रीय सचिव विजय श्रीवास्तव ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसमें कार्यरत कर्मियों की उपेक्षा किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल मनरेगा कर्मियों को सम्मानजनक वेतन, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित भविष्य दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।
मनरेगा कर्मियों की आवाज बनेगा आरएलडी – आदित्य विक्रम सिंह
प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य विक्रम सिंह ने कहा कि मनरेगा कर्मी वर्षों से ग्रामीण विकास की मजबूत नींव बने हुए हैं, लेकिन आज वही कर्मी उपेक्षा का शिकार हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मनरेगा कर्मियों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक राष्ट्रीय लोकदल उनकी आवाज बनकर संघर्ष करता रहेगा।
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