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सदन में उठी स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा देने की मांग, क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बताया गया ऐतिहासिक कदम

सदन में उठी स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा देने की मांग, क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बताया गया ऐतिहासिक कदम।

प्रयागराज।आध्यात्मिक, प्रशासनिक और न्यायिक दृष्टि से देश के प्रमुख केंद्र प्रयागराज मंडल में स्थित स्वरूप रानी नेहरू मेडिकल कॉलेज को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का दर्जा दिए जाने की मांग आज सदन में जोरदार ढंग से उठाई गई।

 

जनप्रतिनिधियों ने इसे क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही आवश्यकता बताते हुए कहा कि यदि यह मांग पूरी होती है, तो यह निर्णय न केवल प्रयागराज मंडल बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और पड़ोसी मध्य प्रदेश के लाखों लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

गंभीर बीमारियों के लिए महानगरों पर निर्भरता होगी कम

सदन में चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रयागराज धार्मिक, शैक्षिक और न्यायिक पहचान के साथ-साथ एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का केंद्र भी है। इसके बावजूद आज भी यहां सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है। इससे न केवल मरीजों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार जान का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है।

कई जिलों की आबादी सीधे तौर पर है निर्भर

जनप्रतिनिधियों ने सदन में यह भी बताया कि स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज पर कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, भदोही, मिर्जापुर और जौनपुर जैसे जिलों की बड़ी आबादी निर्भर है। इसके अलावा बुंदेलखंड क्षेत्र के चित्रकूट, बांदा, महोबा और हमीरपुर जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं। यही नहीं, पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के रीवा और सतना जैसे जिलों से भी गंभीर रोगों से पीड़ित मरीज स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज को प्रमुख चिकित्सा केंद्र के रूप में देखते हैं।

गौरवशाली इतिहास वाला संस्थान है स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज

सदन में यह तर्क भी दिया गया कि स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। यह संस्थान दशकों से चिकित्सा शिक्षा और उपचार के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन हजारों मरीजों का उपचार करते हैं। यदि इस मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा मिल जाता है, तो यहां सुपर स्पेशियलिटी विभागों की स्थापना, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती संभव हो सकेगी।

भौगोलिक स्थिति एम्स के लिए पूरी तरह अनुकूल

वक्ताओं ने कहा कि प्रयागराज की भौगोलिक स्थिति एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थान के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। सड़क, रेल और हवाई संपर्क के लिहाज से प्रयागराज पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के कई जिलों से सहज रूप से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही यहां मौजूद शैक्षणिक वातावरण और विश्वविद्यालयों की उपस्थिति चिकित्सा शिक्षा और शोध को नई दिशा दे सकती है।

युवाओं को शिक्षा और रोजगार के मिलेंगे नए अवसर

सदन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि एम्स का दर्जा मिलने से क्षेत्र के युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा, शोध और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। डॉक्टरों, नर्सों, तकनीकी स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

क्षेत्रीय संतुलन के लिए जरूरी कदम

जनप्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि देश में एम्स संस्थानों के क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की उपेक्षा न की जाए। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं और स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा देना इस असंतुलन को दूर करने की दिशा में निर्णायक कदम होगा।

जनता और सामाजिक संगठनों में जगी उम्मीद

सदन में यह मांग उठने के बाद क्षेत्र की जनता, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों में भी उम्मीद जगी है। लोगों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो प्रयागराज वास्तव में आध्यात्मिक, प्रशासनिक और न्यायिक केंद्र के साथ-साथ चिकित्सा का भी राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरेगा।

केंद्र सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील

अंत में सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से यह अपेक्षा जताई गई कि जनभावनाओं और क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए स्वरूप रानी नेहरू मेडिकल कॉलेज को शीघ्र एम्स का दर्जा प्रदान किया जाए, ताकि करोड़ों लोगों को सुलभ, सस्ती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।

 

Manish Kumar Mishra

Senior Journalist

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