उत्तर प्रदेश

सीएम योगी ने प्रेस वार्ता में विपक्ष को लताड़ा संसद में विपक्ष के आचरण पर CM योगी का तीखा प्रहार।

सीएम योगी ने प्रेस वार्ता में विपक्ष को लताड़ा संसद में विपक्ष के आचरण पर CM योगी का तीखा प्रहार।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम प्रेस वार्ता में संसद के भीतर विपक्षी दलों के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह प्रेस कांफ्रेंस विशेष रूप से इंडी गठबंधन के आचरण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर उनके रुख को जनता के सामने रखने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। योगी ने आरोप लगाया कि जब देशहित और समाजहित के बड़े फैसले लिए जाते हैं, तब विपक्ष का रवैया नकारात्मक और बाधा उत्पन्न करने वाला होता है।

 

प्रधानमंत्री की “चार जातियों” की अवधारणा का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के उस विचार को दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में केवल चार ही जातियां—नारी, गरीब, युवा और किसान—मानी जानी चाहिए। योगी ने कहा कि यह विचार सामाजिक समरसता और विकास की राजनीति को आगे बढ़ाने वाला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राजनीतिक दलों ने वर्षों तक जातिवाद के आधार पर सत्ता हासिल की, वे अब इस समावेशी सोच से असहज हैं। ऐसे दलों को डर है कि अगर समाज एकजुट हो गया तो उनकी राजनीति समाप्त हो जाएगी।

 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम

योगी आदित्यनाथ ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को केंद्र सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि 2023 में पारित यह कानून महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में मजबूत करने के लिए लाया गया है।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस कानून के लागू होने की समयसीमा 2034 तय थी, लेकिन महिला संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों की मांग पर इसे 2029 तक लागू करने की दिशा में संशोधन का निर्णय लिया गया। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया और व्यापक चर्चा के बाद सरकार ने यह कदम उठाया।

 

किसी का हक नहीं छीना जाएगा: सरकार का स्पष्ट रुख

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून को लेकर कुछ राज्यों, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में यह आशंका थी कि इससे उनके प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। लेकिन केंद्र सरकार ने साफ किया है कि किसी भी राज्य या वर्ग का अधिकार कम नहीं होगा।

योगी ने बताया कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में अतिरिक्त सीटें जोड़ी जाएंगी। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर सभी राज्यों में समान अनुपात में सीटों का विस्तार किया जाएगा, जिससे संतुलन बना रहेगा।

 

विपक्ष के रवैये पर सवाल, “नारी विरोधी आचरण” का आरोप

प्रेस वार्ता में योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, डीएमके और आरजेडी जैसे दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद के भीतर इन दलों का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा।

योगी ने आरोप लगाया कि जब महिलाओं को उनका अधिकार देने की बात हो रही थी, तब विपक्ष ने मुद्दे को भटकाने और बाधा डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देश की महिलाओं में आक्रोश है और वे विपक्ष के इस रवैये को “नारी विरोधी” के रूप में देख रही हैं।

 

“द्रौपदी चीरहरण” जैसी स्थिति का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में संसद के घटनाक्रम की तुलना महाभारत के द्रौपदी चीरहरण से करते हुए कहा कि जिस प्रकार उस समय सभा में अन्याय हुआ था, उसी तरह संसद में भी अनुचित और आपत्तिजनक व्यवहार देखने को मिला।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं की टिप्पणियां और आचरण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ थे और यह देश की जनता से छिपा नहीं है। योगी ने इसे लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

 

मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर सपा पर निशाना

योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी द्वारा मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मांग संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

इस संदर्भ में उन्होंने संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म के आधार पर आरक्षण का स्पष्ट विरोध किया था। योगी ने कहा कि उस समय भी इस तरह की मांगों को खारिज किया गया था ताकि देश की एकता बनी रहे।

 

सरदार पटेल की सोच का भी हवाला

मुख्यमंत्री ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी धर्म आधारित आरक्षण का विरोध किया था। योगी ने कहा कि संविधान सभा के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर यह सुनिश्चित किया था कि देश को किसी भी तरह के विभाजनकारी फैसलों से बचाया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज कुछ राजनीतिक दल अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए संविधान की मूल भावना को नजरअंदाज कर रहे हैं।

 

सर्वसम्मति का अवसर गंवाया: योगी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाई होती, तो यह कानून सर्वसम्मति से पारित हो सकता था और यह पूरे देश के लिए गर्व का विषय बनता।

उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा अवसर था जब सभी दल मिलकर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एकजुट हो सकते थे, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐसा नहीं हो सका।

 

महिला सशक्तिकरण बनाम राजनीतिक टकराव

प्रेस वार्ता के अंत में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर देने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस विषय पर व्यापक सहमति बन पाती है या यह राजनीतिक टकराव और गहराता है।

 

योगी आदित्यनाथ की इस प्रेस वार्ता ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की राजनीति के केंद्र में आ चुका है। सरकार जहां इसे ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठा रहा है।

फिलहाल इतना तय है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस और जनचर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा।

 

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