यूपी दिवस: 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश की विरासत, संस्कृति और विकास का भव्य उत्सव।

यूपी दिवस: 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश की विरासत, संस्कृति और विकास का भव्य उत्सव।
प्रदेश के गठन की वर्षगांठ पर गूंजा गौरव और आत्मविश्वास का संदेश
लखनऊ, 24 जनवरी।
उत्तर प्रदेश के गठन की वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को पूरे प्रदेश में यूपी दिवस हर्षोल्लास, उत्साह और गर्व के साथ मनाया गया। 24 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश रखे जाने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। यूपी दिवस न केवल प्रदेश की प्रशासनिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि यह उसकी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक गौरव और विकास की निरंतर यात्रा को भी रेखांकित करता है।
राजधानी से जनपदों तक उल्लास का माहौल
यूपी दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी जनपदों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सरकारी भवनों, सांस्कृतिक स्थलों और प्रमुख चौराहों को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भाषण, निबंध, सांस्कृतिक कार्यक्रम और चित्रकला प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रदेश के इतिहास और योगदान से अवगत कराया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी यूपी की विविधता
यूपी दिवस के मुख्य समारोह में लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। ब्रज की रासलीला, अवध का कथक, बुंदेलखंड का आल्हा, पूर्वांचल का बिरहा और कजरी जैसे लोकगीतों ने मंच पर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश अपनी परंपराओं के साथ आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
विकास यात्रा और उपलब्धियों की झलक
यूपी दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा विकास कार्यों और उपलब्धियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें औद्योगिक निवेश, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को प्रदर्शित किया गया। स्टार्टअप, स्वरोजगार योजनाओं और युवाओं के लिए चल रही पहल को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। प्रदर्शनी के माध्यम से आम जनता को बताया गया कि उत्तर प्रदेश किस तरह विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
ओडीओपी और हस्तशिल्प को मिला सम्मान
यूपी दिवस के कार्यक्रमों में एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी खास आकर्षण का केंद्र रही। बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, मुरादाबाद का पीतल शिल्प, भदोही के कालीन, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी और कुम्हारों द्वारा तैयार मिट्टी के उत्पादों ने प्रदेश की कारीगरी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की झलक दिखाई। बड़ी संख्या में लोगों ने इन उत्पादों की खरीदारी कर स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित किया।
खान-पान में दिखा यूपी का स्वाद
यूपी दिवस के अवसर पर पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए, जहां लोगों ने प्रदेश के प्रसिद्ध स्वाद का आनंद लिया। टुंडे कबाब, लखनवी बिरयानी, कचौड़ी-सब्जी, जलेबी, मथुरा का पेड़ा और बनारसी पान जैसे व्यंजनों ने उत्सव का स्वाद और बढ़ा दिया। खान-पान के स्टॉलों पर दिनभर लोगों की भीड़ लगी रही।
युवाओं और महिलाओं की रही सक्रिय भागीदारी
यूपी दिवस के आयोजनों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को खूब सराहा गया। वहीं युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, नवाचार प्रदर्शनी और स्टार्टअप से जुड़े कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे यह संदेश मिला कि उत्तर प्रदेश की प्रगति में हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।
भविष्य की दिशा का संकल्प
यूपी दिवस केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश के भविष्य के लिए संकल्प लेने का भी अवसर बना। कार्यक्रमों के दौरान यह संदेश दिया गया कि उत्तर प्रदेश अपनी ऐतिहासिक विरासत को सहेजते हुए विकास, रोजगार, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ेगा। आयोजकों का कहना है कि यूपी दिवस प्रदेश को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाने का मजबूत मंच बन चुका है।
गौरव, पहचान और आत्मविश्वास का प्रतीक
कुल मिलाकर यूपी दिवस उत्तर प्रदेश के गौरव, पहचान और आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरा। यह दिन प्रदेशवासियों को अपनी जड़ों से जुड़ने, उपलब्धियों पर गर्व करने और भविष्य के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यूपी दिवस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश केवल आबादी में ही नहीं, बल्कि संस्कृति, सामर्थ्य और संभावनाओं में भी देश का अग्रणी राज्य है।


