राजनीति

उद्धव ठाकरे गुट की बढ़ी धड़कनें।

उद्धव ठाकरे गुट की बढ़ी धड़कनें।

नई पार्षद के अचानक फैसले से दिनभर चला सियासी ड्रामा, देर रात जाकर हुआ सस्पेंस खत्म

मुंबई राजनीति में अचानक मचा हलचल

मुंबई की राजनीति में उस वक्त अचानक उथल-पुथल मच गई, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) की नवनिर्वाचित पार्षद डॉ. सरिता म्हास्के दिनभर संपर्क से बाहर रहीं। उनके फोन बंद रहने और किसी भी नेता से बात न होने के कारण पूरे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। हर कोई यह जानने की कोशिश करता रहा कि आखिर माजरा क्या है और वे कहां हैं।

पार्षद के गायब होने से बढ़ी आशंकाएं

डॉ. सरिता म्हास्के मुंबई के चांदिवली इलाके से शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आई हैं। चुनाव जीतने के तुरंत बाद उनका अचानक लापता होना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया। माना जाने लगा कि कहीं वे सत्तारूढ़ गुट के संपर्क में तो नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल की घटनाएं जिस तरह से सामने आई हैं, उसी अनुभव के चलते इन आशंकाओं ने और जोर पकड़ लिया।

दिनभर नेताओं के फोन, लेकिन कोई जवाब नहीं

पूरे दिन शिवसेना (यूबीटी) के कई वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. सरिता म्हास्के से संपर्क करने की कोशिश की। कोई लगातार फोन करता रहा, तो कोई उनके करीबियों से जानकारी जुटाने में लगा रहा। लेकिन हर प्रयास बेनतीजा रहा। इससे पार्टी नेतृत्व की बेचैनी लगातार बढ़ती चली गई। यह स्थिति उद्धव ठाकरे गुट के लिए इसलिए भी गंभीर थी क्योंकि मुंबई महानगरपालिका में हर पार्षद का समर्थन बेहद अहम माना जा रहा है।

विरोधी खेमे में भी बढ़ी हलचल

डॉ. सरिता म्हास्के के अचानक गायब होने की खबर फैलते ही विरोधी राजनीतिक खेमों में भी चर्चाएं तेज हो गईं। माना जाने लगा कि शायद वे पाला बदल सकती हैं। कुछ नेताओं ने इसे उद्धव ठाकरे गुट के लिए संभावित झटका बताया। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं, जिससे सियासी माहौल और ज्यादा गरमा गया।

देर रात हुआ बड़ा खुलासा

दिनभर चले इस सस्पेंस के बाद देर रात अचानक तस्वीर साफ होने लगी। डॉ. सरिता म्हास्के शिवसेना (यूबीटी) के विधायक मिलिंद नार्वेकर के निवास पर पहुंचीं और उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात की खबर सामने आते ही पार्टी नेताओं ने राहत की सांस ली। इससे यह संकेत मिला कि फिलहाल वे उद्धव ठाकरे गुट के साथ ही बनी हुई हैं और पार्टी छोड़ने का कोई तत्काल फैसला नहीं लिया गया है।

पार्टी के लिए क्यों था यह मामला अहम

मुंबई महानगरपालिका को शिवसेना की राजनीति का गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में हर एक पार्षद का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। डॉ. सरिता म्हास्के जैसी नवनिर्वाचित पार्षद का अचानक संपर्क से बाहर होना पार्टी के लिए राजनीतिक नुकसान की आशंका पैदा कर रहा था। यही वजह है कि पूरे दिन पार्टी नेतृत्व इस मामले को लेकर सतर्क नजर आया।

सियासी संदेश और आगे की रणनीति

इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि महाराष्ट्र की राजनीति में छोटी-सी हलचल भी बड़े सियासी तूफान का रूप ले सकती है। देर रात हुई मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि डॉ. सरिता म्हास्के जल्द ही पार्टी नेतृत्व से औपचारिक मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगी। इससे उद्धव ठाकरे गुट अपनी आगे की रणनीति तय करेगा।

फिलहाल टला संकट, लेकिन नजरें बनी रहेंगी

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बाद फिलहाल उद्धव ठाकरे गुट पर मंडराता बड़ा खतरा टल गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। मुंबई की राजनीति में स्थिरता बनाए रखना किसी भी दल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहा जाए तो डॉ. सरिता म्हास्के के अचानक संपर्क से बाहर होने और फिर देर रात सामने आने से एक दिन तक चला सियासी ड्रामा आखिरकार शांत हो गया। लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि महाराष्ट्र की राजनीति में हर कदम, हर फैसला और हर चुप्पी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

 

Related Articles

Back to top button