तबादलों में मनमानी पर बिफरे पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी।

तबादलों में मनमानी पर बिफरे पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी।
लखनऊ।पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन की प्रांतीय कार्य समिति की बैठक में तबादलों में की गई मनमानी पर पदाधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की दूसरे दिन कई प्रस्ताव पारित हुए। एसोसिएशन की तरफ से पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से अपील की गई कि नियम विरुद्ध तबादलों पर nn प्रबंधन को तुंरत कार्रवाई करनी चाहिए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर कार्यवाही न की गई तो संगठन संवैधानिक तरीके से लडाई लडने के लिए बाध्य हो जायेगा। जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कहा शक्ति भवन में कार्यरत दलित अभियंताओं को मात्र 3 साल में ही बाहर भेजा गया है । जबकि दर्जनों अभियंता शक्ति भवन में 20 वर्षों से जमे हैं। उन पर स्थानांतरण नीति का कोई असर नहीं होता है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री से समय लेकर अब शिकायत करना एसोसिएशन की मजबूरी है।
*अभियंताओं से भराया जा रहा प्रोफार्मा*
कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि कुछ बिजली कंपनियों में स्थानांतरण पर जाने वाले अभियंताओं से प्रोफार्मा भराया जा रहा है। उसमें जाति के कॉलम भराया जा रहा है। जाति भरने पर भी दलित अभियंता भड़क गए है और कहा है कि जब पदोन्नतियों में आरक्षण खत्म कर दिया तो अब जाति का कलम क्यों भरा जा रहा है। हडताल के दौरान पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था संभालने वाले दलित अभियंताओं को चिन्हित किया जा रहा है।
*दलित वर्ग के अभियंताओं में नाराजगी*
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन की दो दिवसीय कार्यकारिणी के आज अंतिम दिन संगठन ने सर्वसम्मत से पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को स्थानांतरण नीति का पालन करने और दलित अभियंताओं के उत्पीडन पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई गई। अन्यथा की स्थिति में पूरे प्रदेश के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता संवैधानिक तरीके से लडाई लडने के लिए बाध्य होंगे। सरकार द्वारा जारी स्थानांतरण नीति में स्पष्ट तौर पर 2 साल से कम सेवानिवृत होने वाले अभियंता संगठन के पदाधिकारी व पति-पत्नी के नौकरी के मामले में शिथिलता बरती गई है। लेकिन पावर कारपोरेशन में इसका लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। कार्यकारिणी बैठक में बिजली कंपनियों में रखे जा रहे मुख्य अभियंताओं के चयन के आधार पर भी सवाल उठाया गया। क्योंकि ज्यादातर मुख्य अभियंता कभी पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की कार्यवाही की जद में हुआ करते थे और आज सबसे आगे है।
पहले प्रबंधन ने ट्रांसमिशन में एक नीति के तहत अभियंताओं को भेजो और अब मनमाने तरीके से किसी को वितरण क्षेत्र में भेजा जा रहा है और और मनमानी नीति पर स्थानांतरण किया जा रहे हैं।
*सीएम और ऊर्जा मंत्री से मांगा समय*
नियमों की अनदेखी को लेकर पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से भी मिलने का समय मांगा है। एसोसिएशन पदाधिकारी जल्द ही उनसे मिलकर नियम विरुद्ध कार्रवाई की शिकायत करेंगे। हडताल के दौरान पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था संभालने वाले दलित अभियंताओं के साथ दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। यह बडा मुद्दा बन सकता है।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष पीएम प्रभाकर, महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपीकेन, संगठन सचिव बिंदा प्रसाद, मनोज सोनकर ,सुशील कुमार वर्मा, अजय कुमार, भजनलाल, गीता आनंद, विकासदीप, आर के राव, राजेश कुमार और इंद्रेश कुमार ने कार्यसमिति की बैठक में इस बात पर चिंता व्यक्त की । उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री की बैठक में यह कहा गया था कि पावर कॉरपोरेशन सचिवालय प्रबंधन में भी कम से कम दो दलित अभियंता रखे जाएंगे। जिसके तहत दो संयुक्त सचिव रखे गए थे, लेकिन 3 साल भी नहीं बीता उन्हें बेवजह हटा दिया गया।
*शक्ति भवन में 20 साल से जमे हैं दर्जन भर से ज्यादा अभियंता*
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि
तबादला नीति का पिक एंड चूज की तरह उपयोग किया जा रहा है। शक्ति भवन में आज भी एक दर्जन अभियंता स्थानांतरण नीति के विपरीत 20 वर्षों से ज्यादा समय से जमे हैं । उन पर कोई भी नीति नहीं लागू हो रही है ।संगठन में आज इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि कुछ बिजली कंपनियों में स्थानांतरण के बाद जाने वाले अभियंताओं से एक प्रोफार्मा भराया जा रहा है। उसमें जाति लिखने का एक अतिरिक्त कालम बनाया गया है । यह अपने आप में गंभीर मामला है। जब उत्तर प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण खत्म कर दिया गया फिर अब जाति क्यों भराई रही है। संगठन की बैठक में यह भी गंभीर मुद्दा उठा की जो स्थानांतरण नीति के तहत संगठन के बिजली कंपनियों में अध्यक्ष व सचिव के पद वाले अभियंता थे उन्हें भी स्थानांतरित कर दिया गया। जबकि बिजली कंपनियों के तरफ से उनके स्थानांतरण को रोकने का अनुरोध भी किया गया फिर भी पावर कारपोरेशन ने चुप्पी साध ली है।
T.N. MISHRA
SENIOR JOURNALIST



