लखनऊ

विद्युत नियामक आयोग के स्थापना दिवस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने की विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात।

विद्युत नियामक आयोग के स्थापना दिवस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने की विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात।

विद्युत नियामक आयोग के स्थापना दिवस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार से की मुलाकात कर उन्हें भारत का संविधान भेंट किया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान उपभोक्ताओं की तरफ से व्यक्त किया गया आभार है । अवधेश वर्मा ने ईंधन अधिभार शुल्क पर बन रहे कानून का विरोध करते हुए उनसे संशोधन की माग उठाई।

विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने हर महीने ईंधन अधिभार शुल्क की गणना के फॉर्मूले पर सवाल उठाया। उन्होंने उसमें कुछ नया क्लाज जोडने की उठाई मांग की। उपभोक्ताओं के सरप्लस की दशा में ईंधन अधिभार शुल्क की राशि को उसमें से घटाया जाए। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि हिसाब निकाला जाए तभी ईंधन अधिभार शुल्क आयोग की अनुमति से हो लागू।

*उपभोक्ता परिषद ने आयोग से साझा की अपने पुराने संघर्षों की कहानी*

आयोग के स्थापना दिवस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग चेयरमैन से अपने पुराने संघर्षों की कहानी साझा की।उन्होंने बताया कि उपभोक्ता परिषद हर संघर्ष का है साक्षी है। उसके लिए सौभाग्य की बात है कि आगे भी आयोग उपभोक्ताओं के हितों में संवैधानिक परिपाटी के तहत निर्णय लेगा । ऐसी उपभोक्ता परिषद को पूरी उम्मीद है।

विद्युत नियामक आयोग के 26वें स्थापना दिवस पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार के साथ ही नियामक आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह से भी मुलाकात की। अवधेश वर्मा ने प्रदेश के 3 करोड 45 लाख विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें भी भारत के संविधान की प्रति सौंपने के साथ ही उन्हें बधाई भी दी। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा विद्युत नियामक आयोग प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हितों में उनका संरक्षण करने के लिए 10 सितंबर 1998 में गठित किया गया था। जो विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के तहत उपभोक्ताओं की सेवा व उनके हितों में समय-समय पर नियम विनियम बनाता है । निश्चित तौर पर इन 26 वर्षों में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हितों में विद्युत नियामक आयोग ने अनगिनत हजारो फैसले किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को बहुत लाभ भी मिला । अपेक्षा है कि आगे भी विद्युत नियामक आयोग उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए हमेशा तत्पर रहेगा। उपभोक्ता परिषद ने आयोग से उपभोक्ता हितों में अपने पुराने अनेकों संघर्षों को याद किया और आपस में चर्चा की। और कहां यह उपभोक्ता परिषद के लिए सौभाग्य की वह हर संघर्ष और उपभोक्ता हितों के निर्णय का साक्षी रहा है।और शरू से ही आयोग की अनेको संवैधानिक कमेटियों में सदस्य के रूप में शामिल होकर जनहित में अपना पूरा योगदान दिया ।

*बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं पर ईंधन अधिभार शुल्क मनमाने तरीके से न लागू कर पाए*

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग सेमी ज्यूडिशल बॉडी के स्थापना दिवस पर आयोग के सामने संवैधानिक परिपाटी के निर्वहन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके तहत बिजलीकंपनियां उपभोक्ताओं पर मनमाने तरीके से ईंधन अधिभार शुल्क न लागू करने पाएं। इस अवसर पर एक प्रस्ताव भी सौपा और कहा गया कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रस्तावित नए कानून में यह भी नया क्लास जोडा जाए कि बिजली कंपनियों का फ्यूल सरचार्ज के मद में जो राशि निकलेगी उसे अनिवार्य रूप से उपभोक्ताओं के पहले से निकले सरप्लस राशि से घटाया जाएगा।

*उपभोक्ताओं का पहले से ही है 33122 करोड सरप्लस*

अवधेश वर्मा ने कहा कि यदि किसी भी स्थिति में बिजली कंपनियों का सरप्लस निकलेगा तभी उन्हें आयोग ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने की इजाजत मिलेगी। उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने पूरी जिम्मेदारी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहां कि मान लीजिए सितंबर के महीने में ईंधन अधिभार शुल्क के मद में उपभोक्ताओं से वसूली के लिए रुपया 1000 करोड निकलता है ऐसे में विद्युत उपभोक्ताओं का जो पहले से 33122 करोड सरप्लस है उसमें से घटाया जाएगा । ऐसे में फिर भी 32122 करोड उपभोक्ताओं का रहेगा। इस प्रकार से गणना की जाएगी जिससे उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित बना रहे।

*प्रस्तावित कानून इस प्रकार से लागू कर दिया गया तो उपभोक्ताओं के लिए साबित होगा काला कानून*

उपभोक्ता परिषद ने अपने प्रस्ताव में यह भी कहा कि यह कानून जिस प्रकार से प्रस्तावित है यदि इस प्रकार से लागू कर दिया गया तो उपभोक्ताओं के लिए काला कानून साबित होगा। इसलिए उसमें अनिवार्य रूप से या संशोधन भी किया जाए बिना आयोग की अनुमति के बिजली कंपनियां खुद वसूली कर ले ऐसा नहीं होगा। साथ ही उपभोक्ता परिषद ने कहा वर्तमान में जो फार्मूला प्रस्तावित किया गया है उस फार्मूले से कभी प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ तो नहीं मिलेगा हर महीने उन पर भार जरूर पड जाएगा । यानी कि उनके मूल्यों में वृद्धि होगी हर महीने ईंधन अधिभार शुल्क की गणना करना संभव नहीं होगा। इसलिए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए।विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष व सदस्य ने आश्वस्त किया कि वह उपभोक्ता परिषद की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करेगा, आयोग हर हाल में उपभोक्ताओं के हितों को संरक्षित रखेगा।

 

T.N. MISHRA

SENIOR JOURNALIST

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