ट्रम्प-भारत: व्यापार तनाव से संकेतों वाली नई पहल।

ट्रम्प-भारत: व्यापार तनाव से संकेतों वाली नई पहल।
वाशिंगटन/नई दिल्ली — यू.एस. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत सरकार के बीच पिछले कुछ हफ्तों में बढ़े व्यापारिक तनाव को कम करने की कोशिशें तेजी से हो रही हैं। दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि वे नए समझौते की ओर बढ़ सकते हैं, जिसमें युवाओं, निर्यात-आयात और ऊर्जा नीतियों पर विशेष ध्यान हो सकता है।
विवाद कहाँ हुआ
ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त 2025 में भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इस कदम का मकसद भारत के रूस से तेल ख़रीदने को लेकर दबाव बनाना बताया गया था।
नई दिल्ली ने इस निर्णय को “अनुचित” और “असमान” करार दिया है, यह कहते हुए कि भारत की ऊर्जा माँग और तेल आयात बाज़ार की स्थितियों पर आधारित है।
तनाव से वार्तालाप की कोशिश
इन विवादों के बाद, ट्रम्प ने कहा है कि भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करना चाहते हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार अवरोधों (trade barriers) को घटाने की संभावनाएँ तलाशना चाहते हैं।
अमेरिका में ट्रम्प के द्वारा भारतीय राजदूत के लिए नामित Sergio Gor ने सेनेट के सामने यह कहकर सकारात्मक संकेत दिए कि दोनों देश “बहुत अलग नहीं हैं” टैरिफ मामलों में, और जल्द ही समाधान हो सकता है।
इसका प्रभाव क्या
भारत के प्रधान आर्थिक सलाहकार ने चेतावनी दी है कि उँचे टैरिफ और निर्यात पर दवाब से देश की जीडीपी में लगभग 0.5-0.6 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है।
भारतीय शेयर बाजारों में हल्की बढ़त देखी गई जब इन संकेतों से यह उम्मीद हुई कि संबंधों में सुधार हो सकता है।
आगे क्या होने की सम्भावना है
दोनों देशों की टीमों के बीच व्यापार वार्तालाप (trade talks) फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
अमेरिका यह चाहता है कि भारत रूस से तेल आयात को कम करे, लेकिन भारत यह स्पष्ट कर चुका है कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक ज़रूरतें उसकी प्राथमिकताएँ होंगी। इस मुद्दे पर संतुलन बनाने की कोशिश हो रही है।
जब तक स्पष्ट समझौता नहीं होता, “उच्च टैरिफ” और “डिप्लोमैटिक शीतलता” बनी रह सकती है, लेकिन संकेत हैं कि दोनों तरफ आर्थिक व कूटनीतिक रिश्तों को सुधारने का इच्छाशक्ति है।