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स्कूलों के लिए आया शासनादेश,बच्चो को सज़ा देने पर लगेगी रोक।

स्कूलों के लिए आया शासनादेश,बच्चो को सज़ा देने पर लगेगी रोक।
हम अक्सर सुनते रहते है स्कूलों में बच्चो को मारा गया और चोट आ गयी।इन सब घटनाओं से कभी-कभी बच्चे अवसाद में भी चले जाते है।बच्चे तो शारीरिक रूप से झेलते है तो अभिभावक मॉनसिक और आर्थिक रूप से परेशान होते है।हालांकि जब भी इस प्रकार की खबर आती है तो शासन प्रशासन द्वारा कार्यवाही भी की जाती है।ऐसे में ऐसी घटनाओं पर पूर्णतयः रोक लगनी आवश्यक है।
स्कूलों के लिए आया शासनादेश।
स्कूलों के लिए आया नया शासनादेश जिसके अंतर्गत अब बच्चो को किसी भी प्रकार से डांटना,मारना,

चुटकी काटना,कमरे में बंद करना आदि सज़ा देना प्रतिबंधित होगा।यह आदेश सरकार के कहने पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा श्री कंचन वर्मा ने जारी किया है।इसको गंभीरता के साथ लागू करने को कहा गया है।
बच्चे स्कूलों द्वारा दी गयी सज़ा के दुष्प्रभाव से बच सकेंगे।
सरकार के इस आदेश से माना जा रहा है कि इससे बच्चे स्कूलों में मिलने वाली सज़ा के दुष्प्रभावों से बच सकेंगे।ऐसा अक्सर देखा गया है कि बच्चो को जब भी किसी प्रकार की सज़ा दी जाती है तो उनके शारीरिक तथा मॉनसिक स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।बच्चो के साथ – साथ अभिभावकों को इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।इस लिए इस शासनादेश को जारी किया गया है जिससे की बच्चो के साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना न होने पाये।
बच्चो को नए तरीकों से समझाये।
बच्चो का मस्तिष्क बहुत ही कोमल होता है।स्वाभाविक है कि उनसे गलती होगी ही।ऐसे में बच्चे को प्यार से समझाये।उनको उनकी गलती पर मारने-पीटने के बजाय सही -गलत का ज्ञान कराये।जब उनको लगने लगेगा कि उन्होंने जो किया है वो सही नही है तो बच्चे वो कार्य नही करेंगे।मारने -पीटने से बच्चो का मॉनसिक तथा शारीरिक विकास रुक जाता है,तथा बच्चे जिद्दी स्वभाव के बन जाते है।इसलिए इन सभी बातों का अध्यापकों तथा अभिभावकों को ध्यान रखना चाहिए।



