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पितृविसर्जन अमावस्या कल: पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व।

पितृविसर्जन अमावस्या कल: पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व।

लखनऊ। श्राद्ध पक्ष का समापन कल पितृविसर्जन अमावस्या के साथ होगा। यह दिन पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करने और उनके लिए श्रद्धापूर्वक तर्पण करने का विशेष अवसर माना जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, पितृविसर्जन पर की गई पूजा-अर्चना से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर सुख-समृद्धि बनी रहती है।

पूजा की विशेष विधि

सुबह स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर नदी, तालाब या घर में गंगाजल युक्त पात्र के सामने पितरों का ध्यान किया जाता है।

तिल, कुश और जल से तर्पण करना अनिवार्य माना गया है। तर्पण के दौरान “ॐ पितृभ्यः स्वधा” मंत्र का जाप किया जाता है।

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूर्वजों को जल अर्पित करना शुभ होता है।

इसके बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, और दान देने की परंपरा है।

महत्वपूर्ण कार्य

1. पितरों का तर्पण – जल, तिल और कुश से पितरों को तृप्त करने का विधान है।

2. श्राद्ध भोज – ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन कराना सबसे पुण्यकारी माना गया है।

3. दान-पुण्य – अनाज, वस्त्र, धान्य और दक्षिणा का दान कर पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

4. पितृगणों का आशीर्वाद – मान्यता है कि पितृविसर्जन पर की गई पूजा से पूर्वज प्रसन्न होकर परिवार को सुख, स्वास्थ्य और संतान की समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

 

धार्मिक मान्यता

पुराणों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति पूरे श्रद्धा भाव से इस दिन पितरों का स्मरण करता है, उसके कुल में शांति और ऐश्वर्य का वास होता है। यह दिन न केवल पितरों की स्मृति का है, बल्कि परिवार में कृतज्ञता और संस्कारों को जीवित रखने का संदेश भी देता है।

कल का पितृविसर्जन पर्व श्राद्ध पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन श्रद्धालु तर्पण, पूजन, और दान-पुण्य करके अपने पितरों को विदाई देंगे और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

 

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