अयोध्या से बड़ी खबर: हनुमानगढ़ी प्रसाद में मिलावट का खुलासा।

अयोध्या से बड़ी खबर: हनुमानगढ़ी प्रसाद में मिलावट का खुलासा।
अयोध्या की धार्मिक आस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। फूड सेफ्टी विभाग की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि हनुमानगढ़ी मंदिर में मिलने वाले प्रसाद के लड्डू और उसमें इस्तेमाल होने वाला घी शुद्ध नहीं पाया गया। यह खुलासा उस समय हुआ जब विभाग ने मंदिर परिसर से प्रसाद के नमूने लेकर लैब टेस्ट कराया।
प्रसाद के दो नमूने जांच में फेल पाये गये
जांच अधिकारियों ने कुल तीन नमूने जांच के लिए एकत्र किए थे। इनमें से दो नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। लड्डू और घी की शुद्धता पर सवाल उठे हैं। इसका मतलब साफ है कि मंदिर में बंटने वाले प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चूक हो रही थी।
श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा असर
अयोध्या पहुंचने वाले लगभग हर श्रद्धालु हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन करता है। अनुमान है कि करीब 99% लोग यहां प्रसाद ग्रहण भी करते हैं। ऐसे में मिलावटी प्रसाद का मामला केवल खाद्य सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बन गया है।
सनातनियो की परंपरा से खिलवाड़।
हनुमानजी को परंपरागत रूप से बेसन के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। लेकिन जांच में यह पाया गया कि इनमें घटिया बेसन और नकली घी का प्रयोग किया गया। यह न केवल परंपरा का अपमान है बल्कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को भी खतरे में डालने वाला कदम है।
पहले ही दी गई थी चेतावनी
हनुमानगढ़ी के महंत संजय दास ने कुछ समय पहले ही दुकानदारों और विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि केवल शुद्ध घी और उच्च गुणवत्ता वाला बेसन ही इस्तेमाल करें। चेतावनी के बावजूद मानकों का पालन नहीं किया गया। अब इस खुलासे के बाद प्रशासन पर दबाव है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे।
पनीर का नमूना भी फेल पाया गया
फूड सेफ्टी टीम ने अयोध्या धाम की एक दुकान से पनीर का नमूना भी लिया था। यह नमूना भी जांच में असफल रहा। यानी सिर्फ मंदिर का प्रसाद ही नहीं, बल्कि आम दुकानों पर बिकने वाला खाद्य पदार्थ भी मिलावट की चपेट में है।
प्रशासन की आगे की कार्रवाई
अब यह सवाल उठ रहा है कि इस मिलावटखोरी के लिए कौन जिम्मेदार है और प्रशासन इस पर कितनी सख्त कार्रवाई करेगा। श्रद्धालुओं की मांग है कि दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं और भविष्य में प्रसाद की गुणवत्ता की नियमित जांच हो।
यह पूरा मामला न केवल अयोध्या के धार्मिक वातावरण को प्रभावित कर रहा है बल्कि आम लोगों में मिलावटखोरी को लेकर बढ़ती चिंता को भी उजागर करता है।



