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भारतीय जाट सभा द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जन्म तिथि पर उनके जीवन पर चलने की अपील।

भारतीय जाट सभा द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जन्म तिथि पर उनके जीवन पर चलने की अपील।

लखनऊ।भारतीय राजनीति के शिखर पर और किसानों के दिलों में राज करने वाले भारत रत्न किसानो के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को आज भारतीय जाट सभा द्वारा उनके जन्मदिवस पर याद किया गया।
चौधरी चरण सिंह किसानों के नेता होने के साथ-साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सच्चे अनुयाई थे ।
उन्हें गांव तथा किसानों से जुड़ी समस्याओं की व्यापक समझ थी ।वह अर्थशास्त्र के छात्र न होने पर भी भारतीय अर्थव्यवस्था का गहराई से जानकार थे।

इसलिए वे देश की प्रगति में गांव को किसानो की सर्वोपरि भूमिका की वकालत करते रहे ।

आपका जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर गांव में हुआ था। उनके पिता चौधरी वीर सिंह एक साधारण किसान तथा माता नेत्रकौर एक धर्म परायण महिला थी।
आपकी शिक्षा आगरा विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर और वकालत की डिग्री लेने के बाद वर्ष 1929 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की ।
1930 में राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने देश में नमक कानून तोड़ने का आवाहन किया ।
सारे देश में आजादी की दीवाने नमक बनाकर अंग्रेजों का काला कानून तोड़ रहे थे और जेल जा रहे थे ।
आपको बताते चलें गाजियाबाद में इसका बीड़ा उठाया चौधरी चरण सिंह ने उन्होंने लोनी नामक गांव में नमक बनाया।
उन्हें 6 महीने की सजा हुई। यह उनकी पहली जेल यात्रा थी। 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरूआत की और 28 अक्टूबर 1940 को वह गिरफ्तार हो गए। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तो उत्तर प्रदेश में पूर्ण रूप सक्षम मंत्रिमंडल का गठन हुआ ।
1948 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने उन्हें अपना सभा सचिव नियुक्त किया तथा सूचना एवं न्याय विभाग सौपा ।इसी दिन से उत्तर प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार विधेयक लागू हुआ। उसी समय जमीदारों एव उनके विरोधियों ने उसका विरोध किया तो प्रदेश में 27 000 पटवारी ने हड़ताल की।
चौधरी साहब ने पटवारीयो की जगह 13000 लेखपालों की भर्ती कर ली।
1953 में चकबंदी अधिनियम पारित कराया। 1954 भूमि संरक्षण कानून पारित कराया । 9 जनवरी 1959 को नागपुर में अधिवेशन में सहकारी खेती का जो प्रस्ताव नेहरू जी ने रखा उसका विरोध भी किया।
आप सभी को याद होगा कि 3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए लेकिन उनकी सरकार एक साल चली ।
वर्ष 1970 में दोबारा मुख्यमंत्री बने किंतु 7 महीने में सरकार गिर गई । पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर 24 मार्च 1977 को मुरारजी देसाई सरकार में गृहमंत्री बने ।लेकिन आपसी मतभेदों के चलते 1978 में मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।
देसाई ने फरवरी 1979 में अपने मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल कर उप प्रधानमंत्री बनाया । देसाई की सरकार गिरने के बाद कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री भारत सरकार बने ।
28 जुलाई 1979 धरा पुत्र चौधरी चरण सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली । उन्होंने 33 वे स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। चौधरी चरण सिंह जीवन भर ईमानदारी से कार्य करते रहे । कभी भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया और ना ही किसी भ्रष्टाचारी का कभी साथ दिया। उनका जीवन एक खुली किताब की तरह था।जिस पर कोई दाग नहीं था ।चौधरी साहब जीवन के अंतिम सांस तक देश के किसानो, पिछङो और दलितो के लिए ही सोचते रहे ।और उनके लिए कार्य करते रहे ।
बीमारी की हालत में वह अमेरिका के हापकिंस अस्पताल में भर्ती थे। तब उनसे मिलने के लिए भूतपूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह उन्हें देखने के लिए गए उस समय उनके मुंह से एक ही वाक्य निकला- ” हमारे देश का क्या होगा” और इसी चिंता के साथ इस किसान मसीहा ने 29 मई 1987 को अंतिम सांस ली और किसान घाट पर आज भी चिर निद्रा में लीन है। वे हमेशा किसानो की समस्याओं के हिमायती रहते रहे।

इसीलिए आज हम सभी देशवासी उनको **किसानों का मसीहा** के रूप में याद करते हैं **आपका जन्मदिन 23 दिसंबर को किसान दिवस के रूप में मनाते है। आज की सभा में उपस्थित समस्त भारतीय जाट सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चौधरी रामराज सिंह, एडवोकेट हाई कोर्ट ,चौधरी धर्मेंद्र कुमार सचिव ,चौधरी राकेश बालियान , डॉक्टर अरुण कुमार, डॉक्टर प्रवीण कुमार ,चौधरी रामकुमार तेवतिया चौधरी रवि कुमार, ब्रिगेडियर डी. आर. सिंह, श्रीमती अलका सिंह, चौधरी आशीष सिंह ग्राम प्रधान बलरामपुर एवं चौधरी मुकेश सिंह शेरे पलिया इत्यादि सभी ने माननीय चौधरी साहब के आदर्शो ,संघर्षों पर चलने का आवाहन किया।

UDAY RAJ

SENIOR JOURNALIST

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